Learning Through Experience..

There comes a time when mere ideas don’t suffice, you ought to get on the ground and face realities. You feel serious inclination to do things. Your perspectives change as you explore. Your prejudices get smashed up and horizons are widened..

Friday, 17 January 2014

                                      छोटा कौन


"तुम उतरो, अभी तुरंत उतरो।" मौसी एकदम से डपटते हुए बोली।
यही कोई चौदह-पँद्रह वर्ष उम्र रही होगी उस नादान की, जो मौसी की डांट से सहम कर ऑटो से उतर गया। आज बहुत दिनों बाद मौसी ऑटो से सफ़र कर रही थी। घर में दो-दो गाड़ी होने के बावजूद ऑटो में सफ़र (दुर्भाग्यवश) करने की झल्लाहट तो थी ही, उस पर से 'उस' बच्चे का मेरे बगल में आके बैठ जाना आग में घी का काम कर गया।


मैं बार-बार पलट कर 'उस' बच्चे को देख रहा था जो एकदम रुआस हो के ऑटो से उतर गया। शर्ट गन्दी और फटी हुई, शरीर से गन्दी बू आ रही थी पर उसके चेहरे पर एक असीम मासूमीयत थी जो शायद मुझसे उसे इस प्रकार दुत्कारे जाने का कारण पूछ रही थी।


मौसी ने मेरे इन हरकतों को Observe कर लिया, और शायद अपने आप को सही ठहराने के लिए बोली,"ये छोटे लोग ऐसे ही होते हैं, एकदम गंदे रहते हैं। पास बैठने से तुम्हे कोई बीमारी भी हो सकती थी।"


मैं पुरे दिन सोचता रहा कि आखिर छोटा कौन है?
वे लोग जिन्हे मौसी छोटा कहती है या हम लोग जो ऐसी सोच रखते हैं।

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